रसायन मुक्त कृषि में बीज उपचार की लगभग 8-10 स्वदेशी तकनीक है, इस लेख में उनके अलावा फसल विशेष बीज-उपचार विधि के बारे में चर्चा करेगे | ध्यान रहे की इसके अलावा लगभग सभी देशी बीज-उपचार की विधि का भी इस्तमाल किया जा सकती है |

देशी गाय के दूध के साथ भिन्डी का बीज-उपचार

भिन्डी के बीजों को 10-30% गाय के ताजे दूध के घोल में 4-6 घंटे भीगकर बीज-उपचार करें |

10% (100 मिलीलीटर दूध 900 मिलीलीटर पानी के साथ, 30%- 300 मिलीलीटर दूध 700 मिलीलीटर पानी के साथ)

फायदे: वायरस जनित बिमारियों में कमी, अंकुरण क्षमता में बढ़ोतरी |

गौमूत्र (देशी गाय) से भिन्डी बीज-उपचार

भिन्डी के बीजों के 7-12% गौमूत्र के घोल में 10 घंटे डुबोकर बीजों का बीज-उपचार करें |

सामान्यतः गौमूत्र से बीज उपचार करते समय कम मात्रा में बीजों को उपचारित करके जांच लें | यदि गौमूत्र घोल ज्यादा तेज (गौमूत्र का ज्यादा %) होगा तो बीजों की अंकुरण क्षमता में कमी हो सकती है, इसलिए शुरुवात में या तो कम प्रतिशत घोल का इस्तमाल करें या तो कम बीजों के उपचारित करने के बाद जाँच लें  

फायदे: अंकुरण क्षमता में इजाफा, पौधों का तीव्र संतुलित विकास