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जैविक कीटनाशक : गौमूत्र एवं मिर्च

उपयोग:

लगभग सभी प्रकार के कीट पतंगों एवं सामान्य फफूंद जनित बीमारियों पर प्रभावकारी

आवयशक सामग्री :-

  • एक मुट्ठी तीखी लाल मिर्च का पाउडर या 10-15 मिर्च की चटनी

  • १ लीटर गौमूत्र

  • ५० ग्राम देसी साबुन

  • आधा लीटर पानी

 

बनाने की विधि :-

  • आधा लीटर पानी में देसी साबुन को घोल लेवें

  • इसके बाद मिर्च का पावडर या चटनी मिलाएं

  • बाल्टी में गौमूत्र लेवें एवं उपरोक्त मिश्रण को मिलाएं

  • एक डंडे से पूरी तरह मिला लें

  • सूती कपडे से मिश्रण को छान ले

  • एक से तीन घंटे के लिए रख दें

  • 10 लीटर पानी में मिलकर छिडकाव करें

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बैगन के बीजों का बीज-उपचार: रसायन मुक्त तरीके

जय जवान, जय किसान , जय विज्ञान

| स्वयं बनाये रसायन मुक्त खेती में प्रयुक्त होने वाली दवा, खाद एवं अन्य सामग्री |

रसायन मुक्त कृषि में बीज उपचार की लगभग 8-10 स्वदेशी तकनीक है, इस लेख में उनके अलावा फसल विशेष बीज-उपचार विधि के बारे में चर्चा करेगे | ध्यान रहे की इसके अलावा लगभग सभी देशी बीज-उपचार की विधि का भी इस्तमाल किया जा सकता है |

 

देशी गाय के दूध के साथ बैगन का बीज-उपचार

भिन्डी के बीजों को 10-15% गाय के ताजे दूध के घोल में 2-3 घंटे भीगकर बीज-उपचार करें | 10% (100 मिलीलीटर दूध 900 मिलीलीटर पानी के साथ, 15%- 150 मिलीलीटर दूध 850 मिलीलीटर पानी के साथ)

फायदे: वायरस जनित बिमारियों में कमी, अंकुरण क्षमता में बढ़ोतरी |

 

गौमूत्र (देशी गाय) से बैगन बीज-उपचार

बैगन के बीजों के 15% गौमूत्र के घोल में 30-45 मिनट भिगारक बीजों का बीज-उपचार करें| सामान्यतः गौमूत्र से बीज उपचार करते समय कम मात्रा में बीजों को उपचारित करके जांच लें | यदि गौमूत्र घोल ज्यादा तेज (गौमूत्र का ज्यादा %) होगा तो बीजों की अंकुरण क्षमता में कमी हो सकती है, इसलिए शुरुवात में या तो कम प्रतिशत घोल का इस्तमाल करें या तो कम बीजों के उपचारित करने के बाद जाँच लें

फायदे: अंकुरण क्षमता में इजाफा, डाई-बेक / गलन एवं अन्य मृदा जनित बिमारियों से छुटकारा

 

बायोगैस स्लरी से बैगन बीज-उपचार

बैगन के बीजों को 7-8 घंटे तक बायोगैस स्लरी में डुबाकर लगाने/बोने से सभी नुकसानदायक सूक्ष्मजीवों के नुकसान से बचा जा सकता है | जड़ों को बढ़ोतरी भी तीव्र गति से होती है

 

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भिन्डी के बीजों का बीज-उपचार: रसायन मुक्त विधियाँ

रसायन मुक्त कृषि में बीज उपचार की लगभग 8-10 स्वदेशी तकनीक है, इस लेख में उनके अलावा फसल विशेष बीज-उपचार विधि के बारे में चर्चा करेगे | ध्यान रहे की इसके अलावा लगभग सभी देशी बीज-उपचार की विधि का भी इस्तमाल किया जा सकती है |

देशी गाय के दूध के साथ भिन्डी का बीज-उपचार

भिन्डी के बीजों को 10-30% गाय के ताजे दूध के घोल में 4-6 घंटे भीगकर बीज-उपचार करें |

10% (100 मिलीलीटर दूध 900 मिलीलीटर पानी के साथ, 30%- 300 मिलीलीटर दूध 700 मिलीलीटर पानी के साथ)

फायदे: वायरस जनित बिमारियों में कमी, अंकुरण क्षमता में बढ़ोतरी |

गौमूत्र (देशी गाय) से भिन्डी बीज-उपचार

भिन्डी के बीजों के 7-12% गौमूत्र के घोल में 10 घंटे डुबोकर बीजों का बीज-उपचार करें |

सामान्यतः गौमूत्र से बीज उपचार करते समय कम मात्रा में बीजों को उपचारित करके जांच लें | यदि गौमूत्र घोल ज्यादा तेज (गौमूत्र का ज्यादा %) होगा तो बीजों की अंकुरण क्षमता में कमी हो सकती है, इसलिए शुरुवात में या तो कम प्रतिशत घोल का इस्तमाल करें या तो कम बीजों के उपचारित करने के बाद जाँच लें  

फायदे: अंकुरण क्षमता में इजाफा, पौधों का तीव्र संतुलित विकास

 

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मटका खाद

जय जवान, जय किसान , जय विज्ञान

| स्वयं बनाये रसायन मुक्त खेती में प्रयुक्त होने वाली दवा, खाद एवं अन्य सामग्री |

मटका खाद के फायदे :-

किफायती | सभी जगह आसानी से बनाया जा सकता है | मटका खाद बनाने के लिए सामग्री गाँव में ही उपलब्ध | खेत की उपजाऊ क्षमता  एवं सूक्ष्मजीवों की संख्या में तीव्र विकास | सही अंतराल में इस्तमाल से किसी भी अन्य खाद की आवश्यकता नहीं

सामग्री:-

  • देशी गाय का गोबर 10 किलो

  • देशी गाय का मूत्र 10  लीटर

  • काला गुड (देशी) 500 ग्राम

  • किसी भी दल का आटा : 500 ग्राम

  • पुराना मटका : एक 1

बनाने की विधि :-

  • सबसे पहले गुड को थोड़े से गौमूत्र में मिला लें, एवं सुनिश्चित करें की गांठ न बची हो

  • इसके बाद दाल के आटे को थोड़े से गौमूत्र में मिला लें

  • इसके बाद सभी सामग्री को मटके में डाल के हाँथ से से मिला लें

  • सभी सामग्री मिल जाने के बाद लकड़ी के डंडे से ३ मिनट सीधी दिशा में एवं ३ मिनट उलटी दिशा में घुमाएँ 

  • मटके के मुह को सूती कपडे से बांधकर छाव में 10 दिन के लिए छोड़ दें

  • प्रतिदिन सुबह एवं शाम इसको लकड़ी के डंडे से मिलाये

  • 10 दिन के बाद मटका खाद तयार है

उपयोग करने का तरीका :-

  • उपरोक्त मटका खाद 200 लीटर पानी मे मिलाने के लिए पर्याप्त है , इसे फसलों के बीच या मेड पर 12-15 दिन के अंतराल में छिडकें

  • सिंचाई के लिए 200 लीटर प्रति एकड़

सावधानी: 

  • खाद बन जाने के बाद 2-3 दिन के अन्दर ही इसका इस्तमाल कर लें

  • ध्यान रखें की जब खेत में पर्याप्त नमी हो तभी इसका छिडकाव करें

 

अधिक जानकारी के लिए: 

पत्राचार हेतु : वैदिक वाटिका, कैलाश ट्रेडिंग कंपनी के निकट, रास्ट्रीय राजमार्ग 78 . गम्हरिया, जशपुर नगर ४९६३३१ , छत्तीसगढ़ 

ईमेल : INFO@VEDICVATICA.ORG

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जीवामृत

जय जवान, जय किसान , जय विज्ञान

| स्वयं बनाये रसायन मुक्त खेती में प्रयुक्त होने वाली दवा, खाद एवं अन्य सामग्री |

फायदे:

  1. फसल कि संतुलित बढ़ोतरी में सहायक

  2. फल, फूल एवं उत्पादन क्षमता में इजाफा

सामग्री :-

  1. 200 लीटर पानी

  2. 10 किलो देसी गाय का गोबर

  3. 1 किलो पीसी हुई कोई भी दाल

  4. 1 किलो गुड

  5. 5 लीटर देसी गाय का मूत्र

  6. एक मुट्ठी सजीव मिट्टी 

बनाने कि विधि :

  1. एक ड्रम में 200 लीटर पानी डालकर सबसे पहले गुड मिलाएं (छोटे टुकड़े करके थोड़े से पानी में मिलकर, जिससे गठान या टुकड़े न बचें)

  2. इसके बाद पीसी हुई दल कि मिलाएं (दल को भी तोड़े से पानी में मिलकर पुरे पानी में मिलाएं ताकि गठान न बने)

  3. इसके बाद गोबर, गौमूत्र एवं सजीव मिट्टी मिलाएं 

  4. बांस या लकड़ी के डंडे से 10 मिनट तक एक दिशा में एवं 10 मिनट तक विपरीत दिशा में हिलाएं 

  5. ड्रम के मुह को बोर या सूती के कपड़े से ढककर 5-7 दिन के लिए छायादार स्थान पर छोड़ दें 

  6. प्रतिदिन शाम के समय एक बार 10 मिनट तक लकड़ी या बांस के डंडे से हिलाएं

  7. 30-48 घंटे में यह इस्तमाल के लिए तैयार हो जाता है 

उपयोग करने का तरीका :

छिडकाव हेतु :

  • 1 लीटर जीवामृत 10 लीटर पानी में मिलकर फसलों पर सुबह या शाम के समय छिडकाव करें

  • फसल कि स्थिति के अनुसार 7-10 के अंतराल में दोबारा उपयोग किया जा सकता है

सिंचाई में :

  • एक एकड़ खेत के लिए 200 लीटर जीवामृत सिंचाई के साथ उपयोग करें |

सावधानी :

  • 6-7 दिन के अन्दर ही इसका इस्तमाल कर लेवें 

  • ज्यादा पुराना होने के बाद यह उपयोग के लिए ऊयुक्त नहीं रहता 

अधिक जानकारी के लिए: 

पत्राचार हेतु : वैदिक वाटिका, कैलाश ट्रेडिंग कंपनी के निकट, रास्ट्रीय राजमार्ग 78 . गम्हरिया, जशपुर नगर ४९६३३१ , छत्तीसगढ़ 

ईमेल : INFO@VEDICVATICA.ORG

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अमृत घोल

जय जवान, जय किसान , जय विज्ञान

| स्वयं बनाये रसायन मुक्त खेती में प्रयुक्त होने वाली दवा, खाद एवं अन्य सामग्री |

फायदे :

  1. फसलों कि कीट रोधी क्षमता में बढ़ोतरी

  2. पौधों कि संतुलित बढवार

  3. कम मेहनत के साथ साथ सिर्फ 24 घंटे में तैयार

सामग्री:

  1. 1 लीटर गौ मूत्र

  2. 1 किलो गोबर

  3. 250 ग्राम गुड या 500 ग्राम सड़े हुए मीठे फल

  4. 10 लीटर पानी

बनाने कि विधि :

  1. 10 लीटर पानी में गोबर को मिलाये|

  2. इसके बाद गौ मूत्र मिलाएं|

  3. गुड को छोटे छोटे टुकड़े में तोड़ लें एवं थोड़े से पानी में मिलाएं| ध्यान रखे कि गुड का कोई टुकड़ा/गांठ न बचा हो, सभी पूरी तरह मिला लें |

  4. गुड के घोल को गोबर एवं गौमूत्र में मिला लें 

  5. घोल को ढक कर मिट्टी के बर्तन में 24 घंटे के लिए छोड़ दें | बर्तन के मुह को सूती कपड़े से ढक दें 

उपयोग करने का तरीका :

छिडकाव हेतु :

  • 10 लीटर पानी में 1 लीटर अमृत घोल मिलकर छिडकाव करें |

  • फसल कि बढवार एवं आवश्यकता अनुसार 8-12 दिन के अनातारल में इसका छिडकाव किया जा सकता है |

सिंचाई में :

  • एक एकड़ खेत के लिए 80-100 लीटर अमृत घोल सिंचाई के साथ उपयोग करें |

 

अधिक जानकारी के लिए: 

पत्राचार हेतु : वैदिक वाटिका, कैलाश ट्रेडिंग कंपनी के निकट, रास्ट्रीय राजमार्ग 78 . गम्हरिया, जशपुर नगर ४९६३३१ , छत्तीसगढ़ 

ईमेल : INFO@VEDICVATICA.ORG

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गाढ़ा अमृत घोल 

जय जवान, जय किसान , जय विज्ञान

| स्वयं बनाये रसायन मुक्त खेती में प्रयुक्त होने वाली दवा, खाद एवं अन्य सामग्री |

फायदा:

फसल कि बेहतर बढवार | स्वस्थ पौधे | सभी पोषक तत्व ग्रहण करने कि क्षमता में इजाफा | कम मेहनत में तैयार | नहीं के बराबर लागत | बाजार से कोई भी सामग्री खरीदने कि आवश्यकता नहीं

सामग्री :- 

  1. गौ मूत्र  (देशी, स्वक्षंद चरने वाली गाय का सर्वोत्तम): 5 (पांच) लीटर

  2. ताजा गोबर  (देशी, स्वक्षंद चरने वाली गाय का सर्वोत्तम) : 1 किलो

  3. ख़राब हो चुके (सड़ चुके या ज्यादा पके हुए ) फलों का रस : 5 लीटर

  4. 6-8 लीटर कि जगह वाला मिट्टी का बर्तन

  5. सूती कपडा

बनाने कि विधि :

  1. तीनो  घटक तत्वों (गौ मूत्र, गोबर एवं रस) को हाँथ से 10 मिनट तक मिलाएं

  2. सूती कपड़े से मिट्टी के बर्तन में ढक कर 5 दिनों के लिए छोड़ दें

उपयोग करने का तरीका :

  • सिंचाई के पानी के साथ गढ़ा अमृत घोल का प्रयोग करें

  • विशेष : प्रति एकड़ 25-30 लीटर गढ़ा अमृत घोल का प्रयोग सर्वोत्तम है

अधिक जानकारी के लिए: 

पत्राचार हेतु : वैदिक वाटिका, कैलाश ट्रेडिंग कंपनी के निकट, रास्ट्रीय राजमार्ग 78 . गम्हरिया, जशपुर नगर ४९६३३१ , छत्तीसगढ़ 

ईमेल : INFO@VEDICVATICA.ORG

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